मांगलिक दोष क्या है? कारण, परिहार और उपाय — बिना डर के पूरी जानकारी
जब मंगल लग्न से 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में हो तो कुंडली मांगलिक कहलाती है। बारह में से छह भाव — इसीलिए बड़ी संख्या में कुंडलियाँ मांगलिक होती हैं। यही पहला कारण है घबराने का नहीं।
शास्त्र स्वयं अनेक परिहार बताते हैं: स्वराशि (मेष/वृश्चिक) का मंगल, विशेष लग्नों में अपवाद, शुभ ग्रहों की दृष्टि — और सबसे प्रसिद्ध: दोनों कुंडलियाँ मांगलिक हों तो दोष परस्पर समाप्त।
जहाँ दोष वास्तव में बनता है, वहाँ परंपरागत उपाय (पूजा, मुहूर्त-विचार) बताए गए हैं। शास्त्र कहीं नहीं कहते कि मांगलिक व्यक्ति का विवाह सुखी नहीं हो सकता — यह भय-व्यापार है, शास्त्र नहीं।
नीचे निःशुल्क जाँचें कि आपकी कुंडली में मंगल कहाँ है — स्वराशि परिहार सहित।
FAQ
परिहार लागू हों तो हाँ — योग्य विश्लेषण आवश्यक है। दोनों मांगलिक हों तो दोष स्वतः निष्प्रभावी माना जाता है।
परंपरा में विशेष पूजा, मुहूर्त-विचार और दान बताए गए हैं — हमारी रिपोर्ट में शास्त्रीय सूची दी जाती है।